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Monday, June 27, 2022

बच्चो की देखभाल | Child Care in Hindi | Bachcho Ki DekhBhal kaise karein

Child Care in Hindi:- जब बच्चा 9-10 साल का होता है , इस भयानक कलियुग में उसे बहुत ज्यादा समझ आ जाती है । हमारे एकॉर्डिंग , जैसे पहले 18-20 साल के बच्चों को दुनियादारी की समझ आती थी , आजकल के 9 10 साल के बच्चों को वो सारी समझ आ जाती है ।

Child Care in Hindi

आपको केयर – टेकर बनना होगा , यही हमारी संस्कृति है । आप अपने बच्चे की नींव इतनी मजबूत कर दो , उसका आधार इतना स्ट्राँग कर दो कि उस पर जो भी महल खड़ा हो , वो उसके लिए ही नहीं , बल्कि पूरे समाज के लिए सुखदायी , फलदायी हो ।

कहने का मतलब है कि बच्चे को इतना मजबूत , इतना बुलंद हौसले वाला , इतना सच्ची इन्सानियत की सोच वाला बनाओ कि उसके नाम से आपकी पहचान हो आपके नाम से अगर पहचान होती है ,

तो मतलब कि बच्चा उतना काबिल नहीं है , लेकिन अगर बच्चे के नाम से आपकी पहचान हो जाए , तो समझो , मां – बाप भी काबिल हैं और बच्चा भी काबिल है ।

बच्चो को क्या क्या सीखना चाहिए | Child Care Information in Hindi


Child Care in Hindi

Image by Pixabay

बुरी सोहबत न करने दें

आप अपने काम – धंधे में मशगूल है , तो कोई बात नहीं । आप बहुत बिजी हैं , तो भी कोई बात नहीं । लेकिन कुछ न कुछ समय अपने बच्चों के लिए जरूर निकालना होगा ।

उसके स्कूल , कॉलेज से पता करवाएं और अपने बच्चे से खुद एज – ए – फ्रेंड , दोस्ताना व्यवहार करके , उसके दोस्त – मित्रों को अपने घर बुलाएं , ताकि आपको पता चले कि आपके बच्चे की मित्र – मंडली कैसी है

इससे यह होगा कि आपका बच्चा खुश होगा कि आप उसके दोस्तों को भी समय दे रहे हैं और आपको पता भी चल जाएगा कि उनमें से कोई ऐसा बच्चा तो नहीं , जो संस्कारी न हो ।

कोई ऐसा तो नहीं , जो आपके बच्चे को भी बदनुमा धब्बा ‘ न बना दे । यह आपका फर्ज बनता है । अगर कोई बुरा बच्चा आपके बेटा या बेटी का दोस्त है ,

तो यह बहुत जरूरी बन जाता है कि कैसे अपने बच्चे की सोहबत उस बुरे बच्चे से हटानी है । तो आप अपने बच्चे को धीरे – धीरे उस बुरे बच्चे की कमियां अपने बच्चे को बताए । उसे बुरे बच्चों की सोहबत न करने दें ।

बच्चे से दोस्ताना व्यवहार रखें ।

बच्चा एकदम से आपकी बात नहीं मानेगा । लेकिन अगर आप अपने बच्चे से फ्रैंडली , दोस्ताना व्यवहार करते हैं और बच्चा आपको भूत – प्रेत नहीं मानता , तो बच्चा आपकी बात जरूर मान लेगा ।

बुरा न मानना , कहने का मतलब है कि अपने देश में कई मां – बाप तो भूत – प्रेत की तरह ही बने रहते हैं । मतलब कि बच्चे उनसे इतना डरते हैं , कि जैसे बात सही नहीं की , तो ताड़ से थप्पड़ जड़ देते हैं ।

कोई काम नहीं किया तो थप्पड़ । कईयों को होता है ऐसा ! कई मां – बाप ऐसे होते हैं । लेकिन नहीं , ये राक्षसीपन है । अगर आप ऐसा कर रहे हो , तो आप अपने बच्चे को बिगाड़ने के रास्ते पर खुद चला रहे हो ।

ऐसा करने से बच्चा आपको असली बात तो बताएगा ही नहीं । क्योंकि आप तो जरा – जरा सी बात पर झापड़ धर देते हो ! आप बच्चे से इतने फ्रैंडली हों कि बच्चे से स्कूल में कोई बात हो ,

कोई उसको टेढ़ी आंख से देखे , तो वो आपको आकर बताए कि पापा ! मम्मी ! आज मुझे फलां ने ऐसे देखा । फलां ने ये टच किया ! फलां ने वो कहा ! फलां आप इतने फ्रैंडली बन गए , तो आपका बच्चा ने ये किया ।

समझदार को इशारा काफी है । अगर दुनिया की भीड़ में कभी नहीं खोएगा और गंदगी फिसलेगा नहीं । ये है बहादुरी अगर आप दिखा सको ।

बच्चे को महकता फूल बनाओ

यह उम्र बड़ी नाजुक होती है । यह वह समय होता है , तब कली , फूल बनने वाली होती है , लड़का है चाहे लड़की । वो खुशबू भी दे सकते हैं और बदबू भी दे सकते हैं ।

कहते हैं कि साऊथ अफ्रीका में ऐसे फूल हैं , जो खिलते हैं तो बदबू देते हैं । कई फूल ऐसे होते हैं , जो दूर से आकर्षित करके खींच लेते हैं । ‘ रात की रानी ‘ रात को महकती है । वाह । क्या खुशबू होती है ।

आश्रम में बहुत जगह पे ‘ रात की रानी ‘ के फूल हैं । एक पौधे का नाम हमने ‘ दिन का राजा ‘ रखा , उसको बनाया , क्योंकि वो दिन को महकता है । उसकी महक इतनी मीठी होती है कि आदमी बरबस ही फूल की तरफ खींचा चला जाता है ।

तो अपने बच्चो को वो ‘ रात की रानी ‘ , ‘ दिन का राजा ‘ बनाओ । वो कटहल या वो धूमर मत बनाओ , जिससे कांटें चुभ जाएं । बच्चे को नेक , अच्छा , भला बनाओ ।

Child Care in Hindi | बच्चो की देखभाल

अपने घर – परिवार में समय दें ।

आप कहते हैं कि मैं बहुत बिजी रहता हूँ , ऑफिस वगैरह में 8 घंटे की ड्यूटी है । आप सच सच बताएं कि आपकी तनख्वाह एक लाख रुपए या दस हजार रुपए या पांच हजार रुपए है ,

लेकिन अगर कोई आपको कहे कि आप 8 की बजाए 12 घंटे काम करो और तनख्वाह डबल लो , तो आप झट से खुशी – खुशी उस काम को करने लगेंगे ।

लेकिन हम यह कहते हैं कि काम तो 8 घंटे ही कर लो , लेकिन आप वो 4 घंटे नहीं , चलो 2 घंटे ही अपने घर – परिवार में , अपने बच्चों में लगाएं , तो आपका सारा परिवार कमाल का बन जाएगा और वो ऐसी तनख्वाह होगी , जो दोनों जहान में आपका नाम रोशन करेगी ।

ये तो आप कर सकते हो । इसलिए टाईम का बहाना मत मारो कि मेरे पास टाईम नहीं है । क्योंकि ये फिजूल की बातें हैं ।

इन्सानियत की शिक्षा दोः

आप बच्चे की पढ़ाई का पूरा ध्यान रखो । वो पढ़ाई में अच्छा होना चाहिए । इसके साथ ही धर्म की , इन्सानियत की शिक्षा भी बच्चों को दो । जैसे आपको बताया था कि जब बच्चा बोलने लगे , तभी से उसको शिक्षा दो ।

यानी शुरू से ही बच्चे को धर्म के बारे में , इन्सानियत के बारे में सिखाएं । जैसे , कोई बच्चा रो रहा हो , तो बच्चे को साथ लेकर जाओ , उस बच्चे को चुप कराओ , उसे कोई चीज दो ।

कोई पशु तड़प रहा है , तो बच्चे को साथ लेकर उसे पानी पिलाओ । पक्षियों के लिए आप दाना डालते हैं , तो बच्चे को साथ लेकर जाओ और उसे बताओ कि हम ऐसा करते हैं , कमाई अपनी है , लेकिन इन दानों को जो भी जीव – जंतु खाएंगे , वो हमें दुआएं देंगे ।

फिर आपके पढ़ाई में अच्छे नंबर आएंगे , गेमों में तरक्की करोगे , आपकी कद काठी बड़ी होगी , इतनी खुशियां आएंगी । क्योंकि बच्चे को ऐसी चीजें ही समझ आएंगी ।

अगर उससे कहोगे कि करोड़ों का फायदा होगा , तो बच्चे को इन चीजों से क्या लेना देना है । हां , अगर कहोगे कि पढ़ाई में अच्छे नंबर आएंगे , तो वो खुद ही दाना डालना शुरू कर देगा ।

यह तरीका है बच्चे को मोल्ड करने का । आप उसको मोल्ड करें , उसको बदलें । बच्चे को सिखाएं कि क्लास में है , किसी के पास बुक नहीं है , तो उसे बुक दो । आपकी दी गई बुक आपके लिए ही फायदेमंद होगी ।

आपका दिया गया बस्ता , आपके बस्ते में अच्छे नंबर लाएगा । ऐसी चीजें सिखाना इस उम्र में अति जरूरी है ।

बच्चे को डरना न सिखाएं :

हम यह नहीं कहते कि सांप से डरना मत सिखाओ , बल्कि उसे यह सिखाओ कि ये सांप है , इसे छेड़ोगे तो काटेगा । बस चुपचाप निकल जाओ , लेकिन ये निगाह भी रखो कि कहीं ये हमें काट न ले । ये सिखाना जरूरी है ।

और ये सिखाना जरूरी नहीं कि हाथ मत लगाना ! काट खाएगा ! उसके पास मत जाना ! ऐसा करना अच्छी बात नहीं । बच्चे को डरपोक बनाने में बच्चे के मां – बाप काफी हद तक जिम्मेवार होते हैं । हमने खुद प्रैक्टिकली ये करके देखा है

बच्चे को ज्ञान देना जरूरी है , न की डराना । उसे सिखाएं कि ये चीजें गलत हैं और ये चीजें सही हैं । क्योंकि 10 साल की उम्र से ही उसको आप बताएंगे , तो वो पहचानने लग जाएगा । दुनिया में धोखा नहीं खाएगा ।

बच्चे को गलत – सही का ज्ञान करवाएं

आपकी बेटी है और आप मां हैं , आप पिता हैं , वो बेटी जिसका मां से या पिता के साथ , जिससे भी ज्यादा लगाव है , वो अपनी बेटी को बताएं कि कोई भी टीचर , कोई भी दोस्त आपको इस तरह से टच करे , इस तरह कुछ कहे , तो वो बहुत गलत होता है ।

वो बहुत गिरी हुई चीज होती है । अगर कभी ऐसा हो तो हमें बताना । ऐसा करना जरूरी है । क्योंकि बच्चे को पता ही नहीं होता कि गलत क्या है । अगर आप नहीं बताएंगे तो उसको क्या पता चलेगा समाज में जाकर कि मेरे साथ गलत हो रहा है या सही हो रहा है ।

तो आपका फर्ज है अपनी बेटी को अलर्ट करना , बजाए किसी और के समझने से । अगर आप ऐसा करते हैं , तो फिर देखते हैं कि कैसे समाज के भेड़िये आपके बच्चे को भी सकते हैं … !

बच्चे को अपनी रक्षा करना सिखाओ

अपने बेटा – बेटी को इतना मजबूत बनाएं , उन्हें सिखाएं बहुत सी चीजें , जो उनके डिफेंस में काम आएं । उसे शरमाना मत सिखाएं । वो जमाना गया , जब बेटी को ‘ अबला ‘ कहते थे , अब सबला की जरूरत है ।

आज दौर ही ऐसा है । आज अबलाओं की कोई जरूरत नहीं , न लड़के की , न लड़की की । आज तो सबला चाहिए । जो समाज के भेड़ियों को मुंहतोड़ जवाब दे सके ।

तो अपने बेटा – बेटी को इसी उम्र में मजबूत बनना सिखाएं । मजबूती के रास्ते पे चलना सिखाएं और उनके अंदर हौसले बुलंद रहें , ऐसी बात बताएं । अगर आप उन्हें ऐसी शिक्षा देंगे , तो यकीनन वो जरूर इस शिक्षा पेचल हुए नेक बनेंगे

बच्चे को अच्छा पहनना सिखाएं ,

यह बच्चे की ऐसी उम्र होती है , जिसमें वो पहनना सीखते हैं । तरह – तरह के फैशन , तरह- तरह के डिजाइन लुभाते हैं । ऐसा नहीं होना चाहिए कि आपका बच्चा इन चीजों से वंचित रह जाए ।

गरीब से गरीब भी कॉटन का डिजाइनदार कपड़ा पहना सकता है और अमीर भी पहना सकता है । आजकल सस्ती चीजें भी मिलती हैं और महंगी भी मिलती हैं ।

आप वैसे किसी दर्जी से भी फैशन बनवा सकते हैं । क्योंकि बच्चे को ऐसा न लगे कि वो किसी और ग्रह का प्राणी है ! बच्चा जिस स्कूल , कॉलेज में पढ़ता , आप उसको वैसी ही शिक्षा दें । बच्चे को यह बताएं कि फैशन का मतलब फैशन है कोई गलत बात नहीं ।

बच्चे को स्वस्थ खाना खिलाएं व उन्हें सिरदर्द न समझें

बच्चे के लिए घर में एक पार्टी रखा करें , जिसमें जूस वगैरह हो । पार्टी में इंडियन कल्चर को अपनाएं , तो और भी अच्छा है । घर में उनकी पसंद की खीर , हलवा , प्याज , आलू , पनीर के पकौड़े बना लीजिए ।

तलने की बजाय , उसे रोस्टेड बनाएं , वो सेहतमंद और टेस्टी होते हैं । आपको ये बड़ा ताम – झाम लगता है , लेकिन यही नींव है बच्चे की । आप मां – बाप क्या करते हैं कि मैगी ला बेटा ।

गर्म पानी में डाल बेटा । खा बेटा । और जा बेटा !! और बेटा जाए भाड़ में … ||| बस , आपकी किटी पार्टी मिस नहीं होनी चाहिए , है ना ? लेकिन यह गलत है आपको यह सिरदर्दी लगती होगी !

लेकिन इस तरह से खिला – खिला कर उन्हें बड़े करोगे , तो यह ऐसी सिरदर्दी बनेगी कि आप अनाथ आश्रम में बैठे होंगे । क्योंकि बच्चों को भी लगेगा कि यार , ये बुजुर्ग तो सिरदर्दी बन गए ।

… सो जा बापू अनाथ आश्रम में जा । … क्योंकि जैसे आपने मैगी खिलाकर कह दिया था ना कि जा बेटा , खेल । वैसे ही वो बच्चे कहते हैं कि जा बापू , अनाथ आश्रम में खेल , अब यहां कोई काम नहीं ।

ये तो ‘ जैसे को तैसा ‘ है । क्योंकि अगर आप उन्हें टाईम नहीं देंगे , तो उनके टाईम में वो भी आपको टाईम नहीं देंगे । इसलिए जरूरी है कि उनको टाईम दो । उन्हें स्वस्थ खाना दो ।

उनके केयर – टेकर बनो । यही हमारी संस्कृति है बच्चों के , मां – बाप केयर टेकर होते हैं और जब मां – बाप बुजुर्ग हो जाते हैं , तो यही बच्चे उनके केयर टेकर बन जाते हैं ।

ऐसी संस्कृति पूरे वर्ल्ड में कहीं नहीं है इतनी स्वस्थ , इतनी अच्छी , गजब की संस्कृति ! … तो अपने बच्चों को टाईम जरूर दीजिए , जब भी आप समय निकाल पाएं । हफ्ते में एक बार उनके साथ इंजॉय करें । आपसे उनका लिंक न टूटने पाए । यह बहुत जरूरी है ।

बच्चा बड़ा होता जा रहा है , आप उसे अच्छी शिक्षा देते जा रहे हैं । आप उसे स्वस्थ खाना खिलाएं । उनकी पार्टी 15 दिन में , महीने में जब भी आपको ठीक लगे , रख लेते हैं ।

उससे बच्चा कल्चर को भी समझता है और खाने – पीने की चीजों को भी । तो वो खाना बच्चे के टेस्ट के अनुसार बनाएं , ताकि वो कैमिकल फूड से बचकर रहे ।

डिब्बा बंद खाने से परहेज करें ।

आपसे एक और गुजारिश है । हम किसी कंपनी के विरुद्ध नहीं है , लेकिन कोई टीन – पैकिंग है या जो पाऊच होते हैं , उसमें जो बंद होते हैं जूस , खाना वगैरह है , तो हमें लगता है कि वो 10-15 साल के बच्चे को बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए ।

आप सर्च करके देख लो , इनसे कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है । हमने एक रिसर्च पढ़ी है । साईटिस्ट कह रहे हैं कि कैंसर की संभावनाएं बढ़ जाती हैं , जो लोग टीन जूस पीते हैं , कोल्ड ड्रिक्स पीते हैं ।

तो इन सबकी बजाए गर्मी में ठंडाई , जूस आदि बच्चों को दें । कई सोडा वगैरह आते हैं , तो उसमें थोड़ा सा डाल दो , तो वही गैस – वगैरह बन सकती हैं , उसको वैसा ही बनाया जा सकता है और बिल्कुल फैश भी । वो बच्चे के लिए सेहतमंद है ।

नॉनस्टिक बर्तनों का प्रयोग न करें :

एक बात और आपको बताते हैं , 10 साल की उम्र में ही नहीं , बल्कि किसी भी उम्र में … तो आजकल नॉन स्टिक तवे पे बनी रोटी खाते हैं । उसपे खाना चिपकता नहीं ।

तो एक सर्च हमने पढ़ी कि वो कैंसर का एक कारण बनता है नॉनस्टिकी । ठीक है कि नॉन स्टिक बर्तनों में खाना नहीं चिपकता , लेकिन वो खाने में चिपक जाता है उसके अंदर ऐसे तत्व होते हैं , जो खाने में चले जाते हैं । आजकल तो कूकर भी नॉनस्टिक मैटिरियल से बनते हैं ।

ज्यादातर घरों में तवे भी वही होते हैं । लगातार वो खाना खाने से खतरा बढ़ जाता है । इसलिए आप ध्यान दीजिए । हमारी जो संस्कृति थी , क्या कमाल थी । हमारे यहां मिट्टी के तवे होते थे या फिर लोहे के तवे होते थे ।

तो बेतहर है कि आप नॉनस्टिक तवों को बेच दें और लोहे के अच्छी क्वालिटी के तवे लेकर रखें और उसपे खाना बनाएं । थोड़ी कला भी आपको आ जाएगी और बच्चे की ही नहीं , आपकी और आपके बुजुर्गों की , सबकी सेहत गजब की होगी ।

पानी ज्यादा पीएं

आप लोग पानी ज्यादा पीया करें और बच्चे में पानी पीने की आदत डालें । क्योंकि पानी ज्यादा पीने से शरीर के विकार , बैक्टीरिया , वायरस जो हैं , वो टॉयलेट , बाथरूम के रास्ते निकल जाते हैं ।

आप उसूल बना लें कि मैंने 5-7 लिटर पानी रोज जरूर पीना है । यकीन मानिये , इससे पथरी बनना आदि आपके नजदीक भी नहीं फटकेंगी अगर आप अमल करोगे तो । क्योंकि बच्चे भी आपसे ही सीखेंगे ना । इसी तरह बच्चों में ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की आदत डालें ।

ऑर्गेनिक सब्जियां उगाएं ।

आजकल हर चीज में बहुत से कैमिकल हैं । सब्जियों में , दूध में , फ्रूट में , घी , पानी में बहुत से कैमिकल डाले जाने लगे हैं । इनसे बचना बड़ा मुश्किल हो गया है , लेकिन जितना बचा जा सके , उतना बचो ।

आपने बढ़िया आलीशान कोठी बनाई , बहुत ही अच्छा । हमें तो खुशी है कि हमारे बच्चों की आलीशान कोठी है । आपका छोटा – सा घर है , तो भी हमें बहुत खुशी है कि आपका रैन – बसेरा है ।

पर उसमें थोड़ी – सी जगह अपने लिए रख लो , उसमें ऑर्गेनिक सब्जियां लगाओ । जैसे कद्दू , लौकी , तोरी , टिंडी आदि के दो – चार बीज डाल दो , तो हमें लगता है

कि 6-8 महीने तक आपको ऑर्गेनिक सब्जियां आपके घर में ही मिलती रहेंगी , और सारे खर्च बचते रहेंगे । इससे डेकोरेशन भी हो जाएगी । क्योंकि उनके फूल खूबसूरत लगेंगे ! और जब फल आएंगे तो फल कई होते हैं शहरी बाबू , वो कहते हैं कि जी , हमारे तो पक्के मकान हैं , कहां सब्जियां उगाएं ।

तो आपकी इस समस्या के हल के लिए भी यहां एक सिस्टम बना रहे हैं । मालिक ने चाहा तो ( बहुत जल्द ) आपको बताएंगे , फिर आप अपने पक्के घर में तो क्या , दुकान में भी सब्जियां पैदा कर पाएंगे ।

फिर भी अगर न पैदा करें , तो फिर वही बात है कि ‘ नाच न जाने , आंगन टेढ़ा । आप बोलें सही कि क्या दिक्कत है , सतगुरु – मौला हल हमसे करवा देंगे । … तो कहां फ्रैश – फ्रैश सब्जी तोड़कर बनानी ।

उसका टेस्ट ही गजब का होता है । घर में आपके जगह है , तो दो – चार पौधे लगा लो । बड़े गमलों में लगा सकते हो । अगर उसके फल को खाओगे , वो खट्टा भी होगा , तो वो भी आपको 36 प्रकार का मीठा लगेगा ।

क्योंकि वो खुद का है और है भी ऑर्गेनिक । इसलिए सेहत के लिए तो मीठा ही है । … तो प्यारी साध – संगत जीओ । आजकल बहुत – से कैमिकल हैं । आप अपनी नन्ही – सी जान को इन कैमिकलों में मत डुबाओ ।

ऊपर से आप दूसरा फूड यानी ‘ जंक फूड ‘ खिलाते हैं । तो वो बहुत ही डेंजर है । इससे आपका पीछा तो जल्दी छूट जाता है , लेकिन जंक फूड से बच्चों के साथ सारी उम्र के रोग जुड़ जाते हैं ।

30-35 की उम्र में जाते – जाते वो तरह – तरह के रोग पैदा करने शुरू कर देता है । मसल्स की प्रॉब्लम आती है । अंदर तेजाब बनने लग जाता है ! हाई ब्लड प्रेशर , मोटापा , कमजोरी आ जाती है तथा और भी सी बीमारियां आ जाती हैं ।

फिर आगे उनके बच्चे होंगे , तो वो भी कहां से ‘ तीस मार खां ‘ होंगे ? वो भी वैसे ही पैदा होंगे । इसलिए बच्चों को स्वस्थ खाना दें । दूध वगैरह जो आप लेते हैं , वो भी बड़ा ध्यान से लें । क्योंकि यूरिया से , टैबलेट से , कैमिकल से बहुत से दूध बनते हैं । तो इसका भी आप पूरा ध्यान रखा करें , जितना आप रख सकें ।

बच्चे की पढ़ाई का ध्यान रखें ,

जब बच्चा पढ़ता है , तो आप उसका होमवर्क करवाए । उसका साथ दें । उसको उत्साहित करे । निरुत्साहित न करें । मान ले कि जैसे उसका पहला स्कूल टैस्ट हुआ है , उसमें बच्चे के अच्छे नवर नहीं आए तो खाने को मत आओ । काटने को मत आओ कि ये क्या किया तूने ।

उसे ऐसा कहें कि बेटा , कोई बात नहीं । पहला ही टेस्ट है ना । अगली बार हम तुझे पढ़ाएंगे , फिर अच्छे नंबर आएंगे , फिर तू नाम रोशन करेगा , फिर मैं तुझे गिफ्ट दूंगा ।।

ऐसा करने से यकीनन बच्चा दोगुने उत्साह से पढ़ाई करेगा और अव्वल आएगा बच्चे को इतना मत डराओ कि वो आत्महत्या की सोचने लग जाए । यह तो कभी भी नहीं होना चाहिए ।

फाइनल पेपरों में भी थोड़े कम नंबर आ जाएं , तो भी यह कहें कि बेटा , नंबर तो अच्छे लाने थे । लेकिन कोई बात नहीं अगली बार हम तेरा साथ देंगे । तू कर सकता है , तुझमें ताकत है । इस तरह की बातों से उसका हौसला बढ़ाएं , उत्साहित करें ।

नहाना , कपड़े पहनना सिखाएं :

child Care in Hindi

बच्चे को इस उम्र में नहाना , कपड़े पहनना आदि चीज प्रफैक्टली आना चाहिए , क्योंकि वो 10 साल का हो चुका है । वर्ल्ड में तो 5-6 साल के बच्चों को यह सब कुछ आता है आपके यहां तो 10 साल के बच्चे को यह सब कुछ आना ही चाहिए ।

असल में तो 4-5 साल के बच्चे को यह आना चाहिए । जैसे आप उसे अपने साथ नहलाते हैं , तो हमें नहीं लगता कि ये चीजें सही हैं । अगर आप ऐसा करेंगे , तो उसमें कांफिडेंस कैसे आएगा । वो 10 साल पीछे रह जाएगा दुनिया से । आपने उसको आगे लेकर जाना है ।

तो बच्चों को खाना , नहाना , पहनना आदि आना चाहिए । यहां तक कि हमने यहां के स्कूलों में तीसरी क्लास में बैंकिंग भी शुरू कर रखी है कि बैंक में एकाउंट कैसे खुलवाना है , कैसे डील करना है उन्हें सिखाया जाता है । ऐसा हो तो फिर मजा है ।

आप दुनिया से एडवांस चलें , पीछे न चलें । अभी कुछ दिन पहले की बात है , कोई हमें बता रहा था कि यहां से किसी का ट्रांसफर हो गया वो अपने बच्चे को यहां के इंटरनेशनल स्कूल से हटाकर अपने साथ ले गए , वो पता नहीं चंडीगढ़ या दिल्ली में !

वो कहता कि मैंने वहां सारे स्कूल ढूंढ लिए , लेकिन जितनी सुविधा और जितनी हाई टेक्नीक यहां के इंटरनेशनल स्कूलों में है , वो कहीं भी देखने को नहीं मिली ।

तो थोड़ी फीस ज्यादा है , तो आप चीख उठते हैं । तो जितना पैसा उस नई तकनीक में , एडवांस लाने में लगता है , वो तो लगेगा ना । आप उसकी तरफ देख लेते हैं , लेकिन यह नहीं देखते , यानि जैसे सब्जी मिलती है दस रुपए किलो ।

आप सोचते हैं कि यह गोभी 10 रुपए किलो मिल रही है , और यही गोभी 25 रुपए किलो मिल रही है । लेकिन शायद आपको पता नहीं कि वो 10 रुपए में सारी स्प्रे मिल रही है और 25 रुपए में सिर्फ गोभी मिल रही है । क्योंकि आर्गेनिक सब्जी कभी सस्ती नहीं होती ।

और वो बेदाग भी नहीं हो सकती । उसमें कोई न कोई कीड़ा भी हो सकता है । लेकिन उस कीड़े को , पूरे फूल में से उस हिस्से को काटकर निकाल दो , तो बाकी जो सारा फूल है , वो आपके लिए सौ प्रसेंट सही है , तंदुरुस्ती लाने वाला है । वो डेंजर नहीं है ।

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बच्चे को व्यवहार सिखाओ :

Child Care in Hindi:- बच्चे को खाने – पीने , रहने , पहनने का अच्छा व्यवहार सिखाएं । वर्ल्ड में नहीं है अच्छा व्यवहार । हालांकि उनको कई चीजें आती हैं , जैसे खाना बढ़िया आता है कि वो चम्मच की आवाज नहीं आनी चाहिए । चम्मच से इतना उठाओ , काटो , कब काट दिया कि पता ही न चले ।

और कब आपने खाना मुंह में डाला , कैसे उसको चबाना है , सारी चीजें माना कि वर्ल्ड में कहीं न कहीं बच्चों को सिखा सकते हैं । अच्छी हो सकती है , लेकिन ये सब आप भी अपने बच्चे को अच्छा बोलना सिखाएं ।

जैसे घर में कोई मेहमान आता है , तो आते ही बच्चा उन्हें नारा ‘ धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा ‘ लगाए । इसमें शर्म किस बात की । इससे स्टैंडर्ड हाई होगा , लो नहीं होगा ।

ये हॉय – बॉय से हाई नहीं होता और इस हॉय – बॉय का मतलब होता है कि कैसे हो ? और ‘ धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा ‘ का मतलब है कि भगवान तेरा भला करे ‘ । जो नारा लगाता है , वो दूसरे को भी कहता है और खुद को भी कहता है कि ‘ मालिक दोनों का भला करे ‘ ।

क्या है वर्ल्ड में कोई ऐसा नारा ? सामने वाले को समझाओ कि मेरे बच्चे ने जो बोला है , उसका मतलब यह है कि भगवान आपका भी भला करे और मेरा भी भला करे ‘ । अब सोचो कि सामने वाला कितना प्रभावित होगा कि यार , बच्चा भी दुआएं दे रहा है ।।। तो यह व्यवहार अपनाओ ।

बच्चे को सिखाएं कि घर में कोई मेहमान आता है , तो उनसे खुलकर बातचीत करनी है , उनसे शरमाए नहीं । कैसे उनके साथ बैठकर व्यवहार करे , यह सिखाएं ।

हमने देखा है अपने देश में , इतनी उम्र के बच्चों को भी तमीज नहीं होती । वो क्या बोल दें , कब क्या कह दें , कुछ पता नहीं होता । और आप कौन – सी परवाह करते हैं ? बच्चों के सामने ही ऐसी – ऐसी बातें होती हैं , जो मियां – बीवी की पर्सनल होती हैं और आप वो अपने बच्चों के सामने बोलते रहते हो ।

और तब आपका सिर शर्म से झुक जाता है जब बच्चा मेहमानों के सामने वही बात कर देता है । फिर आप उसको डराते हैं , डांटते हैं । लेकिन पहले आपको किसने कहा था कि उसको ये सब बताओ ? तो ये परहेज रखना अति जरूरी है

इस उम्र ( 9-10 साल ) में बच्चा 100 प्रसेंट अलग सोना ही चाहिए । असल तो इससे पहले ही । लेकिन इस उम्र में तो 100 प्रसेंट जरूरी है । ठीक है कि आप लाड़ – प्यार कीजिए , सोने से पहले उसके कमरे में , उसके साथ चारपाई पेलेट जाइये , उससे लाड – प्यार कीजिए , बातें सुनाइये ।

लेकिन उसको यह मालूम हो कि बाद में इन्होंने उठकर अलग जाना है और मैंने आराम से सोना है । इतना कॉंफिडेंस उसको होना चाहिए । क्योंकि इस उम्र में ही नहीं , बल्कि 5-6 साल के बच्चे को ही मां – बाप से अलग सुलाना ही चाहिए ।

बच्चे के सामने झूठ बोलना , लड़ना – झगड़ना नहीं चाहिए :

बच्चे के सामने कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए और लड़ने – झगड़ने का तो मतलब ही नहीं होना चाहिए ! आप कहेंगे कि पिता जी , ऐसे कैसे अवॉयड कर सकते हैं ! अब गुस्सा आ गया , तो यह थोड़े ही देखेंगे कि बच्चा कहां है । लेकिन भाई , देखना तो पड़ेगा ।

वरना फिर बड़े होकर , यह मत कहना किये गालियां मेरे से तो सीखा नहीं । मैं तो ऐसा नहीं होता था । पता नहीं कहां से सीख आया । लेकिन आप ही ट्रेनर हैं , उसे जैसी ट्रेनिंग देंगे , वो आपको ही फल बख्शेगा बड़ा होकर । इसलिए ऐसा नहीं करना चाहिए ।

और बच्चे के सामने हाथा – पाई का तो मतलब ही न हो । ये जो आप मर्दानगी दिखाते हो न । थप्पड़ मार दिया । और आपको लगता है कि मैं कितना शूरवीर- बहादुर हूं । तू भाई , बहादुर है तो अपने मन से लड़ के दिखा … छक्के न छूट जाएं तो … किसी पे हाथ उठाना … बिल्कुल गलत है ।

10 साल के बाद बच्चे पर भी हाथ उठाना गलत है । हमें लगता नहीं कि बच्चे पर आपको हाथ उठाना चाहिए । आंखों का डर ही इतना होना चाहिए कि वो कुछ भी गलत न करे ।

अगर वो कुछ गलत करे , तो आंखों से घूरी दो , ताकि बच्चा डर जाए । उसे पता चले कि ये नाजायज है , ये मांग मेरी कभी पूरी नहीं होगी । तो इस तरह से आप अपने बच्चे को गाइड करें ।

बच्चे को मैनर्स सिखाएं :

Child Care in Hindi: बच्चे को सिखाएं कि स्कूल बैग कैसे रखना है । बच्चे को मैनर्स सिखाएं खाने के , उठने – बैठने के , सोने के ! यानि सोते समय खुले कपड़े पहनने चाहिएं । क्योंकि सोते समय नेच्युरैली बॉडी ग्रॉथ करती है ।

कई लोग छोटे बच्चों के डायपर लगा देते हैं , हमें , कहीं न कहीं लगता है कि कई चीजों का कारण वो भी होता है । क्योंकि कुदरत ने तो हमें बिल्कुल आजाद पैदा किया है । तो जैसे पुराने टाईम में एक कपड़ा बांधा करते थे . पहले की व्याख्या में हमने बताया था ,

हम फिर दोहरा रहे हैं कि वो ढीला – सा कपड़ा , जिसे पंजाबी में ‘ पोतड़ा ‘ कहते हैं , वो खुल्ला – सा कॉटन का कपड़ा होता है , वो लगा दें । बच्चे के नीचे प्लास्टिक सीट हो , ऊपर एक टॉवल हो और अगर बच्चे ने बाथरूम कर दिया तो टॉवल चेंज कर दो लेकिन आजकल के मां – बाप तो कमाल के हैं ।

वो बच्चे को डायपर लगाते हैं , और बच्चे को यूं बांध देते हैं , जैसे पहले ऊंटों के खोपे चढ़ाया करते थे आंखों पे , कि वो इधर – उधर न देखे । … तो वो बच्चा बीच में ही बाथरूम , पोटी करता रहता है और वो सड़ांस कर – करके उसके बैक्टिरिया , वायरस पनप जाते हैं ।

वो बहुत ही डेंजर्स होते हैं । हमारी तो यही राय है । बाकी कितने लोग मानते हो , वो मालिक जाने । ये आधुनिक चीजें फायदा लाती हैं , तो नुकसान कई गुणा ज्यादा लाती हैं फायदा ये है कि चलो , सफर के टाईम आप बच्चे को वो पहना दें कि सफर पे या मार्केट में जा रहा हूं , तब आप उसे डायपर लगा दें ।

और जब बच्चा घर में है तो उसे खुला रहने दें । लेकिन आपको तो आराम चाहिए । बच्चे से क्या लेना- देना । और यह हमारी संस्कृति नहीं है । तो आपका बच्चा अब 10 साल का हो गया है , तो रात को उसने कौन से कपड़े पहनने है , इसका ध्यान रखें । वो थोड़े खुल्ले कपड़े पहने । नाईट – सूट , उसको पता हो कि कैसा होना चाहिए ।

प्राकृतिक तरीके से बॉडी अपने – आपको रिपेयर करती है रात को , जो वाहेगुरु , गॉड , राम ने एक सिस्टम बनाया है । कहने का मतलब है कि सारा दिन आप काम करते हैं , आपकी बॉडी वर्क करती है और जब आप रात को सोते हैं , बॉडी नहीं सोती , बल्कि ये अपने – आपको रिपेयर करती रहती है ।

साथ ही बच्चा रात को सोते समय सुमिरन करके सोए , ताकि आत्मा भी रिपेयर होती रहे । बच्चे को बताओ कि सुमिरन करते – करते सोओगे , तो आपके पढ़ाई में अच्छे नंबर आएंगे ।

आप बलवान बनोगे । बॉडी मजबूत बनेगी । इत्यादि – इत्यादि । आप ऐसी बातें बच्चे को इस उम्र ( 9-10 साल की आयु ) में बताओगे , तो नेच्युरैली वो सुमिरन करके ही सोएगा और आपको अलग से कहना नहीं पड़ेगा कि सुमिरन करो ।

क्योंकि उसको पहले से ही पता होगा कि सुमिरन करने से नंबर अच्छे आएंगे । बॉडी पावरफुल बनेगी । और यह है भी सच । आपको ये सच्ची बात बता रहे हैं , कोई लारा लगाना नहीं सिखा रहे ।

बच्चे को खुशमिजाज बनाएं

बच्चे को गुमसुम रहना मत सिखाए . बल्कि खुशमिजाज रहना सिखाए । स्वस्थ सुनाए , वो आपको सुनाए , ऐसा होना चाहिए । अश्लीलता से उन्हें दूर रखा यह काम आप बच्चों को खुशमिजाज बनाएं . मजाक , स्वस्थ चुटकुले वगैरह आप उसे करते रहते हैं , तो आपका बच्चा नेक बनता जाएगा , मजबूत बनता जाएगा

शरीरिक श्रम करना सिखाएं :

इस उम्र में बच्चे से बॉडी वर्क लेना भी शुरू करें । उसको सिखाएं कि कैसे शरीर मजबूत बनता है । छोटी उम्र से ही बच्चे को तैरना सिखाएं । योगा करना सिखाएं ।

बच्चे अगर शुरू से ही जिम्नास्टिक करते हैं , तो बड़े होकर उनका हड्डी टूटना आदि का मतलब ही नहीं बनता । और मां को बच्चे के जन्म के बाद 2-3 साल फीड जरूर देना चाहिए । इससे हड्डियां बहुत मजबूत बनती हैं और हड्डियों पे ही मसल्स का ढांचा बनता है ।

शरीर में होने वाले बदलावों के जानकारी बताएं :

जब बच्चे की उम्र 10 से 15 साल की होने लगती है , आजकल 12 साल के बच्चे में ही जवानी आने लग जाती है । आप यह मत सोचो कि 16-17 साल में ही जवानी आएगी ।

तो फिर वो जवानी की सारी चीजें बच्चे के 15 साल के होने तक उसको सिखाएं । उनमें जो परिवर्तन आ रहे हैं , मा अपनी बेटी को और बाप अपने बेटे को सिखाए । जवानी की वो सारी चीजें बताएं , सिखाएं ।

क्योंकि वो सब आपके साथ हो चुका है , उसको छुपाने की जरूरत नहीं है । अगर आप छुपाएंगे , बच्चा कुछ गलत काम करेगा , तो गलत तरफ जा सकता है । लेकिन आप बच्चे को सही तरह से सब कुछ सिखाएंगे , तो बच्चा कुछ गलत भी नहीं करेगा और समझेगा भी कि ये परिवर्तन है , और कुछ नहीं है ।

बच्चे को लगे कि मेरे में परिवर्तन हो रहा है , और अलग से कुछ नहीं हो रहा । क्योंकि 12 से 15 साल के बच्चे में उमंग उठती है , अलग- अलग तरह के जज्बात होते हैं , तरह – तरह की बातें खुश करने के लिए काफी होती हैं । ‘

छोटे- छोटे इशारे जिंदगी के मकसद बन जाते हैं , …. सो वो स्वस्थ इशारे हो , स्वस्थ तरीके से बच्चों को जवानी का मतलब सिखाएं , भलाई – नेकी करना सिखाएं , एक्सरसाईज करने की बच्चे में आदत डालें ।

सुबह – शाम आपका बच्चा फुल एक्सरसाईज करे और फिर कैसे एक्सरसाईज के बाद बॉडी बैकअप करती है , रिलेक्स कैसे होता है , वो बच्चे को आप सिखाएं ।

कुछ मां – बाप अगर खुद करते हो , तो अपने बच्चे को सिखाएंगे ना । दो – दो बजे तो वो खुद उठते हैं । वो क्या सिखाएंगे ? बच्चे , पहले ही , स्कूल जाकर आ जाते हैं , वो आकर उठाते हैं कि पापा , उठ जाओ , मैं स्कूल जा आया । हो सकता है कि कुछ ऐसे भी हों आपमें ।

बच्चे को कब दादा – दादी ने तैयार करके भेज दिया , कुछ पता ही नहीं । और पापा उठता है कि अच्छा बेटा । तू जा भी आया …। तो भाई , आप ऐसे पापा न बनो । आप भी एक्सरसाईज जरूर किया करो । अरे , अपने लिए नहीं , तो कम से कम बच्चे के लिए ही कर लिया करो कि मैंने अपने बच्चे को मजबूत बनाना है । आप बना सकते हैं , क्योंकि इस उम्र में आप जैसा चाहो , वैसा बच्चे के शरीर को बनाया जा सकता है ।

तो इस तरह बच्चा जवानी की दहलीज पर कदम रख गया है , जवानी में प्रवेश कर गया है । उसमें चेंजेज आना , आवाज का बदलना , बालों का आना , बालों का झड़ना आदि बहुत सी चीजें इसमें आती हैं ।

बहुत से अंग विकसित होते हैं बहुत से परिवर्तन शरीर में आने लगते हैं । तो मां – बाप को ही अपने बच्चे को गाईड करना चाहिए , बजाय कोई और करे । … तो क्यों न मां – बाप पहले से ही बच्चे को तैयार रखें कि ऐसा होगा ।

जैसे कि मां अपनी बेटी को समझाए , ऐसे ही बाप अपने बेटे को समझाए कि जोश आता है । उसे अच्छे कामों के लिए लगाना है । तो इस तरह बच्चों को गाईड करें ।

छोटी – छोटी समस्या को भी हल करें ।

बच्चों के दोस्त बनकर आप उनका साथ दें उनकी समस्याओं का हल करें । चाहे वो छोटी- छोटी ही बातें हैं , लेकिन उनके लिए वो बहुत बड़ी समस्या होती है वो छोटी – छोटी बात ।

उसका पैन अगर सही नहीं चल रहा , दूसरों के पैन सही चल रहे हैं और आपका बच्चा रोज पैन मांग – मांग कर काम करता है , तो ये उसके लिए इतनी बड़ी समस्या है , जितना कि आपके जमीन – जायदाद का झगड़ा है ।

अगर आप अपने बच्चे के साथ फ्रैंडली हैं , और एक दिन भी उसका पैन न चला , तो वो आपको बता देगा कि पापा , पैन नहीं चल रहा । आगे से आप कहें कि ला बेटा , नया पैन ला देता हूं । तो आप चाहे सस्ता पैन ही ला दो , लेकिन बच्चे को लगेगा कि यार , पापा को बताने में मजा आ गया । झट से इच्छा पूरी हो गई

बच्चे के खाने का समय निर्धारित करें

बच्चे के खाने का सही समय निर्धारित करें कि ब्रेकफास्ट , लंच , इवनिंग टी , डिनर इस टाईम में लेना है । साथ यह जरूर सिखाएं कि शाम का खाना खाने के बाद चहल – कदमी करनी चाहिए ।

यानी आप बच्चे को अपने साथ घुमाएं एक किलोमीटर या जितना भी आप घुमा सकते हैं । यह आदत आप बच्चे में 10 साल की उम्र से भी डाल देंगे , तो सारी उम्र वो बच्चा सुखी रहेगा , क्योंकि रात का खाना खाकर सो गए , तो फैट आदि हो जाता है ।

जबकि खाने के बाद घूमने से हाजमा बढ़िया रहता है और शरीर में पावर ज्यादा आती है , तंदुरूस्ती बनी रहती है । उन्हें सुबह जल्दी उठना , रात को जल्दी सोना भी सिखाएं । तो आप इस तरह से अपने बच्चों को सिखाएंगे , तो आप नेक मां – बाप बन जाएंगे और आपके बच्चे बड़े होकर आपकी कद्र करेंगे ही करेंगे ।

क्योंकि नेक नियत पर चलाने का जो रास्ता आपने उनको दिखाया है , वो कभी नहीं भूल पाएंगे और उसकी खुशियां इज्जत के रूप में , प्यार – मोहब्बत के रूप में आपको जरूर मिलेंगी ।

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