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Monday, November 28, 2022

गर्मी से कैसे बचें | Garmi Se Kaise Bachen

Garmi Se Kaise Bachen: ग्रीष्म ऋतु भारत के छह मौसमों में से एक है जो अप्रैल से प्रारंभ होकर जुलाई के अंत तक रहती है । लेकिन बदलते पर्यावरण के दौरान इसमें समय दर समय बदलाव आता गया ।

देखा जाए तो इस बदलाव का कारण स्वयं मानव ही है जो प्राकृति के नियमों के साथ छेड़छाड़ करता है और इसका खामियाजा लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है ।

Garmi Se Kaise Bachen | गर्मी से कैसे बचें

इसलिए शायद गर्मी का नाम सुनकर ही लोगों के पसीने निकल आते हैं । जरा सोच के देखें : पुराने समय के दौर में जब लोगों के घरों में कूलर , पंखे , फ्रिज , एसी और सुख सुविधाओं के साजो – सामान नाम मात्र के बराबर हुआ करते थे , लोग चिलचिलाती धूप में , तपती धरती पर कड़ी मेहनत से काम करने के बावजूद भी स्वस्थ रहते थे ।

बीमारियां कभी उनके पास फटकने की कोशिश नहीं करती थी , वहीं आज के इस आधुनिकता के दौर में जहां वैज्ञानिकों ने हर सुविधाओं को एक कमरे में कैद कर दिया है , फिर भी लोग गर्मी की मार झेलने को मजबूर हैं , क्यों ?

कारण कई हैं लेकिन प्रमुख कारण पर्यावरण बदलाव के साथ मौसम का बदलता स्वरूप जो मानवीय जीवन पर कहर बनकर बरस रहा है । लेकिन इस कहर से बचा जा सकता है यदि गर्मियों के मौसम में हम थोड़ी सी सावधानियों को अपनाएं तो ।

गर्मी का सुरक्षा कवच | Garmi ka Suraksha Kawach

Garmi Se Kaise Bachen

Image By Unsplash

लिक्विड (Liquid): अत्याधिक तापमान बढ़ने के कारण शरीर में मेटाबोलिक सिस्टम बिगड़ जाता है जिससे शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है । साथ ही लगातर पसीना निकलने के कारण फ्ल्यूड्स और नमक का स्तर भी गिर जाता है ।

जिसके कारण शरीर कमजोर होने लगता है और डिहाईड्रेशन , जोडिस , डायरिया जैसी बीमारियों के होने की आशंका बढ़ जाती है । गमियों में विशेषकर हरे नारियल का पानी जरूर पीएं ये शरीर में लिक्विड की मात्रा को ठीक रखता है ।

क्योंकि इसमें विटामिन – बी काफी मात्रा में पाया जाता है जो शरीर को ठंडा व तापमान सामान्य बनाए रखने में सहायता करता है । बुजुर्ग वर्ग के लिए यह खास फायदेमंद है ।

गर्मीयों में कोशिश करनी चाहिए कि एक दिन में कम से कम चार लीटर पानी जरूर पीएं लेकिन इस बात का ध्यान जरूर रखें कि किडनी की समस्या से पीड़ित मरीज पानी ज्यादा मात्रा में न लें ।

गर्मी में आमतौर पर देखा जाता है कि लोग पानी में बर्फ डालकर पीते है ऐसा नहीं करना चाहिए , क्योंकि बर्फ शरीर में गर्मी पैदा करती है । गर्मी में छाछ का सेवन अमृत के सामान है दोपहर के भोजन के बाद पानी की जगह छाछ में काला नमक डालकर पीएं , इससे शरीर से निकले ठंडी भी रहती है ।

नमक की भरपाई हो जाती है और शरीर का तापमान व त्वचा नींबू पानी भी फायदेमंद है , लेकिन ध्यान दें कि सोफ्टड्रिंक का सेवन न करें ।

गर्मी के चलते यदि आप कम पानी पीते हैं तो आप यूटीआई ( यूरीन ट्रैक इन्फेक्शन ) का शिकार हो सकते हैं

गर्मी का फैमिली डाक्टर | Garmi ka Doctor

Garmi Se Kaise Bachen

तरबूज (Watermelon): जी हां , ये वो डॉक्टर है जो बिना दाम के आपके स्वास्थ्य का ध्यान रखता है । इसमें औषधीय गुण छिपा हुआ है , शायद इसीलिए इसे गर्मियों का फैमिली – डॉक्टर कहा जाता है ।

गर्मियों में उच्च तापमान के कारण यदि आप के सिर में दर्द होने लगता है तो तरबूज के रस में थोडी शकर डालकर पीने से दर्द तुरंत – मंतर हो जाएगा । त्वचा के रोगों में भी इसका प्रयोग किया जा सकता ।

सूर्य की तेज किरणें जब त्वचा पर पड़ती है , खासकर युवाओं के चेहरे पर तो फोड़े , फूंसी निकल आते । इनसे निजात पाने के लिए नियमित रूप से तरबूज खाया करें ।

हाई ब्लडप्रेशर की रोकथाम में इसका सेवन बहुत फायदेमंद है क्योंकि इसमें कुरकुबोसाइट्रिन तत्व पाया जाता है जो तरबूज की सहायता ले सकते हैं ।

पारिजाक के चार पहरेदार ब्लडप्रेशर को कंट्रोल करता है । उल्टी आने की शिकायत करने वाले भी तरबूज की सहायता ले सकते हैं ।

Garmi Se Kaise Bachen

शोध कहते हैं कि तापमान के बढ़ते क्रम के साथ युवाओं में कई तरह के मस्तिष्क बदलाव आने लगते हैं जो मस्तिष्क व संपूर्ण तंत्रिका तंत्र को इस हद तक प्रभावित करते हैं कि व्यक्ति अपने मस्तिष्क से नियंत्रण खो बैठता है

जिससे उसे अधिक क्रोध आने लगता है ऐसी स्थिति में आपके मस्तिष्क की रक्षा केवल चार पहरेदार ही कर सकते हैं , जिन्हें आप अनार , सेब , केला और संतरे के नाम से जानते हैं । ये चार पहरेदार ही आप के मस्तिष्क की रक्षा गर्मी से कर सकते हैं ।

अनार (Pomegranate): इसमें एंटी – ऑक्सीडेंट्स की मात्रा भरपूर पाई जाती है जो मस्तिष्क में फ्री – रेडिकल्स पर काबू रखता है और कोशिकाओं को बर्बाद होने से बचाता है ।

सेब (Apple): नियमित रूप से सेब का सेवन करने से यह मस्तिष्क में न्यूरांस को मजबूत करता है , जिससे आपकी याददाश्त शक्ति बढ़ती है ।

केला (Banana): केला मस्तिष्क हितकारी व मनभावना है । इसमें पोटेशियम का उच्च स्तर होता है जो मस्तिष्क में ऑक्सीजन स्तर को नियमित बनाए रखने में मददगार होता है । इसमें ट्रिप्टोकन तत्व पाया जाता है जो मस्तिष्क की कार्य क्षमता बढ़ाता है और तनाव से मुक्ति दिलाता है ।

संतरा (Orange): इसमें थाइसीन की मात्रा अधिक पाई जाती है जो भोजन को उर्जा में बदलती है । इसमें विटामिन बी -6 पाया जाता है जो मस्तिष्क को सक्रिय रखने में सहायता करता है ।

हॉट मौसम में लें लाइट एंड कूल डाइट

गर्मियों में शरीर का ध्यान रखना सबसे ज्यादा जरूरी है । ऐसे में यदि खान – पान के प्रति विशेष ध्यान न दिया जाए तो प्रतिदिन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है ।

इस समस्याओं का सामना करने से बेहतर है कि आप भोजन में सही डाइट का सेवन करें । इस मौसम में भी खाने से पहले इस बात का ध्यान रखें कि आप कुछ जो खा रहे है वह लाइट हो , उसमें वसा काफी मात्रा में हो , ताकि खाना जल्दी से पच सके ।

Garmi Se Kaise BachenImage By Pixabay

मौसमी सब्जियां , जैसे लौकी , पत्ता – गोभी , तोरी , टिंडा , सीताफल इनका जितना हो सके भोजन में सेवन करें । लेकिन हां , छोले और राजमा जैसी सब्जियों से इस मौसम में दूरी बनाए रखें ।

भोजन बनाते समय देसी घी , वनस्पति घी के अलावा सरसों का तेल और ऑलिव ऑयल का प्रयोग कम करें । जितना हो सके नारियल या सोयाबीन के तेल का प्रयोग करें ।

नमकीन , मूंगफली , आलू के चिप्स और तेल में बने फूड न लें तो ही बेहतर होगा । सुबह के नाश्ते की शुरूआत आप ठंडी लस्सी , दही , मिल्क या फूट शेक के साथ भेलपूरी , ढोकला , राइस जैसी भांप में पकी चीजों के साथ कर सकते हैं ।

Garmi Se Kaise Bachen

ये नाश्ते हल्के भी होते है और स्वादिष्ट भी । दोपहर के भोजन में अरहर व मूंग की दाल के साथ सलाद , खीरा , ककड़ी का प्रयोग करें । शरीर की व्याकुलता कम करने के लिए दही या दही की लस्सी का सेवन भी कर सकते हैं । हरे पत्ते वाली साग- सब्जियां भी जरूर प्रयोग करें ।

इस बात का ध्यान रखें कि भोजन – भर पेट न खाएं , क्योंकि ज्यादा खाने से इस मौसम में पेट खराब होने की आशंका रहती है ।

गर्मी के नुक्सान | Garmi Ke Nuksaan in Hindi

भारत में अधिकतम भागों में साल – भर 4-8 महीने खूब गर्मी पड़ती है , जिसके चलते एग्जीमा , जोंडिस , डायरिया , दाद , खाज – खुजली जैसी कई बीमारियां दस्तक देती हैं ।

लू (Hot Air):

ये मई तथा जून में चलने वाली गर्म हवाएं होती है । जिसके कारण शरीर में नमक व पानी की कमी हो जाती है ।

इससे खून की गर्मी बढ़ जाती है , सिर में भारीपन महसूस होने लगता है , खून की गति तेज हो जाती है , नाड़ी की गति बढ़ने लगती और बुखार काफी मात्रा में आने लगता है ।

हाथ तथा पैरों के तलुओं में जलन होने लगती है और अचानक बेहोशी आने से कभी -कभी मौत भी हो सकती है । इसलिए ज्यादा बाहर न जाएं , यदि जाना भी पड़े तो सिर पर कपड़ा जरूर रखें ।

घमोरियां:

ये 1-2 मि . मि . के लालिमा लिए हुए छोटे दाने होते हैं जो पूरे शरीर पर , विशेषकर कपड़े से ढके हुए भागों या रगड़ लगने वाले हिस्सों में पाए जाते हैं ।

इनसे बचने के लिए हवादार स्थानों पर रहें , साथ ही खुले व पतले कपड़े पहनें । दिन में दो या तीन बार ठंडे पानी से स्नान करें ।

प्लास्टिक की थैली में बर्फ लपेटकर घमोरियों पर सेक करने से भी लाभ मिलेगा । स्किन कैंसर : स्किन कैंसर धूप में रहने वाले ऐसे कम उम्रदराज लोगों में हो सकती है , जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो ।

स्किन कैंसर (Skin Cancer):

ज्यादातर शरीर के चेहरे , गला , कान , नाक , गर्दन या हाथ पर पाई जाती है । डॉक्टरों के मुताबिक धूप की अल्ट्रावायलेट किरणें स्किन कैंसर का प्रमुख कारण होती हैं ।

गैस्ट्रोइटाइटिस (Gastrotaitis):

गर्मियों में बासी खाना खाने से इस बीमारी का सामना करना पड़ सकता है । इस मौसम में खाना जल्दी खराब हो जाता यदि इस बात का ध्यान न रखा जाए तो उल्टी और फूड पॉयजनिंग से आप ग्रस्त हो सकते हैं ।

डीहाइड्रेशन (Dehydration):

शरीर से लगातार पसीना निकलने के कारण शरीर में पानी व नमक की कमी हो जाती है । जिससे शरीर का तापमान बिगड़ जाता है ।

गर्मी रेड जॉन कर शिकार हो सकता है आप का मस्तिष्क

एक रोचक मगर महत्वपूर्ण शोध सामने आया है । कोलम्बिया विश्वविद्यालय के डॉ . इंगे गोल्डस्टीन के अनुसार कि गर्मी के दिन में कहर बरसाने वाली गर्म हवाएं मानसिक असंतुलन पैदा करती हैं खासकर , जो लोग पहले से मानसिक रूप से असंतुलित होते हैं उनमें विक्षिप्त कर तंत्रिका तंत्र पर चोट करती हैं ।

उन्होंने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि गर्मी के दिनों में मानसिक संतुलन इस हद तक बिगड़ जाता है कि घरेलू झगड़े , कार्यस्थल पर नोंक – झोंक सामान्य बात हो जाती है ।

हिंसक प्रवृति अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ने लगती है । डॉ . गोल्डस्टीन का कहना है कि गर्मी का प्रकोप पूरे व्यक्तित्व को प्रभावित करता है । गर्मी की भीषणता आंतरिक अंगों पर भी प्रभाव डालती है ।

किसी ठंडे प्रदेश से गर्म जगह पर आया व्यक्ति इस हद तक विक्षिप्त – सा हो जाता है कि वह अपने पर काबू नहीं रख सकता और स्वयं भी अपने शरीर में बदलाव महसूस करता है । वह न केवल चिड़चिड़ा बल्कि उग्र भी हो जाता है ।

Conslussion

इस पोस्ट में हमने बताया है की ज्यादा गर्मी में राहत कैसे पाया जाता है हमारी ये पोस्ट गर्मी से कैसे बचें (Garmi Se Kaise Bachen) आपको जरूर पसंद आएगी अगर आपको हमारी ये पोस्ट गर्मी से कैसे बचें (Garmi Se Kaise Bachen) पसंद आये तो आप इसे कमेंट और शेयर जरूर करें

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