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Thursday, August 4, 2022

Information About Kasturi Mrig in Hindi |कस्तूरी मृग के बारे में जानकारी | Kasturi Mrig in Hindi

Kasturi Mrig: पौराणिक कथाओं का हिस्सा बना कस्तूरी मृग (Kasturi Mrig) आज दुर्लभ प्राणियों की श्रेणी मे है । इसके बारे सुना बहुत जाता है , लेकिन बहुत ही कम लोगों ने इसे देखा होगा । संतों की वाणी मे इसका जिक्र जरूर आता है ।

क्योंकि संत – महात्माओं ने इसे प्रतीक के रूप मे लिया है , कि जिस प्रकार यह मृग अपनी ही सुगंध के स्त्रोत से बेखबर जंगल मे टक्करें मारता रहता है , उसी प्रकार मनुष्य भी अपने अन्त करण में विराजमान प्रभु को बाहर खोजता हुआ व्यर्थ मे ही जन्म बेकार कर चला जाता है ।

इस मृग की नाभि में कस्तूरी होती है जिसकी खुशबू से वातावरण महक उठता है और इस महक में मदहोश हुआ यह मृग फिर इसकी तलाश में भटकता रहता है । हवा के कारण जिस ओर कस्तूरी का प्रवाह होता है , यह उधर ही दौड़ने लग जाता है और चूर – चूर हो जाता है।

इसे कस्तूरी मृग (Kasturi Mrig) क्यों कहते हैं:-

Kasturi Mrig

यह इस मृग की आन्तरिक जैविक प्रक्रिया का उत्पाद है । जो एक झाड़ीनुमा पौधे के खाने से बनती है जिसे केदारपाती या नायरपाती कहते हैं । यह पौधा 6000 से 10000 फीट की ऊंचाई पर ठण्डे क्षेत्रों मे होता है ।

इस पौधे मे रात की रानी से भी तेज सुगंध निकलती है । इसकी पत्तियां व डंठल वगैरह हर भाग खुशबूदार होता है कस्तूरी मृग की यही खुराक होती है ।

जब वह इसे खाता है तो उसकी पाचन प्रणाली के तहत इसकी नाभि के जैविक सेल से इनका रिएक्शन होता है जिसके फलस्वरुप इसकी नाभि में एक पदार्थ बनने लगता है जिसे कस्तूरी ‘ कहते हैं ।

इसकी नाभि मे एकत्रित हुई यही कस्तूरी दूर दूर तक खुशबू छोड़ती रहती है और यह खुद भी इस महक से आनंदित होता रहता है । लेकिन खुद इसके वास्तविक स्त्रोत से अनजान बना रहता है ।

यही कस्तूरी इसकी जान की दुश्मन बन जाती है । इस कस्तूरी के लिए ही इनका शिकार किया जाता है । क्योंकि यह दुर्लभ पदार्थ बहुत मंहगे भाव मे बिकता है ।

अब इन मृगों के कम हो जाने से आजकल शिकारियों , तस्करों ने उस झाड़ी को ही काटना शुरू कर दिया है , जो इनकी खुराक है । इसके भी बाजार मे महंगे भाव मिलते हैं ।

पहले वो इस झाड़ी से अनभिज्ञ थे । लेकिन जब उन्हें पता चला कि यह उपयोगी झाड़ी है जिसका इस्तेमाल इत्र , धूप और परफ्यूम इत्यादि मे होता है तो इसका अवैध कारोबार चल पड़ा है ।

सरकार द्वारा कस्तूरी मृग (Kasturi Mrig) के साथ – साथ इस पौधे को भी बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं । कृषि विशेषज्ञों द्वारा इस पौधे को मैदानी इलाके मे उगाने की कोशिशें तो की जा रही हैं लेकिन अभी तक पूर्णतया सफलता नहीं मिल पाई है

कस्तूरी मृग (Kasturi Mrig) कहाँ पाया जाता है:-

Kasturi Mrig

मृग लुप्त होने के कगार पर पहुचीं इस प्राचीन प्रजाति का यह प्राणी पूरे विश्व में केवल नेपाल के हिमालयी क्षेत्र व भारत के उतराखण्ड के ऊंचे वृहत पर्वतीय श्रृंखलाओं मे रहता है ।

यह एक शर्मीले स्वभाव वाला जीव है जो ठण्डे पर्वतीय भागों मे रहना पसंद करता है रंग – रूप में यह मृग मैदानी इलाकों में रहने वाले मृग से मिलता जुलता है जिसके शरीर पर सफेद चकतों की बनावट होती है लेकिन दांतों की विशेषता है जो इसे मैदानी मृग से अलग दिखाते है ।

इसके जबड़ों से दोनों और एक – एक दांत बाहर की ओर निकले हुए होते हैं जो इसकी विशेष पहचान है । अपने शिकारी के प्रति यह बहुत सतर्क रहता है । लेकिन फिर भी शिकारियों की पैनी नजरों से इसका बचना मुश्किल हो गया है ।

इसकी बेशकीमती खाल व कस्तूरी ने इसको शिकारियों का मुख्य निशाना बना दिया है । यही कारण है कि अब ये बहुत कम संख्या मे रह गए हैं । एक जानकारी के अनुसार वर्ष 1997 के आंकड़ों के मुताबिक उतराखण्ड मे इनकी संख्या 1200 थी ।

मगर अब कोई आंकड़े प्रस्तुत नहीं हैं । हां , वर्ष 2006 मे अस्कोट मे 96 कस्तूरी मृग (Kasturi Mrig) थे । लुप्त होने के कगार पर पहुंची इस प्रजाति के यह मृग अस्कोट अभ्यारण्य , पिंडारी ग्लेशियर , गंगोत्री नेशनल पार्क , बद्रीनाथ , केदारनाथ , माणा आदि इलाकों मे आज भी देखे जा सकते हैं

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