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Saturday, November 26, 2022

जाने लोहड़ी के बारे में दिलचस्प बातें | Lohdi in Hindi

Lohdi in Hindi: पर्व या त्यौहार भारतीय संस्कृति और सभ्यता के शाश्वत प्रतीक हैं । भारत में समय – समय पर पर्व उत्सवों को अत्यंत श्रद्धा , आस्था , उमंग , उल्लास और उत्साह के साथ विभिन्न परंपराओं और रीति – रिवाजों के साथ मनाया जाता है ।

इनसे जुड़ी पौराणिक कथाएं हमें प्रेरणा तो देती हैं , साथ ही रीति – रिवाज , संस्कृति से जुड़ने का अवसर भी देती हैं । ऐसा ही पारस्परिक सौहार्द और रिश्तों की मिठास सहेजने का पर्व है- ‘ संक्रांति पर्व ‘ , ‘ लोहड़ी ‘ (Lohdi) ।

लोहड़ी (Lohdi) कहाँ मनाई जाती है ?

लोहड़ी (Lohdi in Hindi) को उत्तरी भारत अर्थात् पंजाब , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश एवं दिल्ली आदि राज्यों में बड़े धूमधाम एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है । यह मूलतः किसानों का पर्व है ।

लोहड़ी (Lohdi) कब मनाई जाती है ?

लोहड़ी पंजाब में मनाया जाने वाला विशेष त्यौहार है और प्रायः 13 जनवरी को मनाया जाता है ।

लोहड़ी (Lohdi) कैसे मनाई जाती है ?

Lohdi in Hindi

लोहड़ी (Lohdi in hindi) हेतु अलाव जलाने के लिए छोटे – छोटे बच्चे घर – चार दिन में लकड़ी उपले मांगते है । शाम को लकड़ियों की ढेरी लगाकर उसपर उपले रखे जाते है।अलाव जलाया जाता ।

सपरिवार या समाज भर के लोग मिलकर चारों तरफ एकत्र होकर नाच – गाकर खुशी मनाते हैं । पहन एवं सजकर आग के चारों तरफ ढोल एवं नगाड़ों की थाप पर भंगहा एवं गिद्दा डालते , नाचते जलती आग को तिल मक्का , चावल , गेहू , एक मूंगफली आदि की तिलचौली डालते हैं ।

धारणा कि इससे वातावरण में कफ , ठड का प्रकोप कम होता है । इस अवसर पर रंग – बिरंगे नए कपड़े गाते हैं । इस पर्व पर पूरी तरह र गाव की लोक – संस्कृति झलकती है । यह मिट् की सोंधी खुश्बू वाले पंजाब के मेहनती एवं लशाली लोगों का मुख्य त्यौहार है ।

सम्पूर्ण पंजाबी लोक – संस्कृति स्वरूप वाले इस त्यौहार में जो भंगड़ा एवं गिद्दा नृत्य किया जाता है उसमें पंजाबियों का शौर्य – बल दिखता है ।

ये दोनों नृत्य अन्य सभी भारतीय- नृत्यों से हट कर हैं । पंजाब में लोहड़ी का त्यौहार आने के कई दिन पहले युवा लड़के – लड़कियां द्वार द्वार पर जा कर गाना गा गा कर लकड़ियाँ तथा मेवा मांग कर इकट्ठा कर लोहड़ी की रात आग जला कर नाचते गातें व फल मेवा खाते हैं ।

Lohdi in Hindi | लोहड़ी में क्या खाया जाता है ?

Lohdi in Hindi

पौष मास की ठंड और आसमान में रूई की भांति फैली धुंध में आग सेकने और उसके चारों ओर नाचने – गाने का अपना ही आनन्द होता है । इस दिन हर कोई एक – दूसर का आदर – सम्मान करता है।लोग एक – दूसरे को रेवड़ी , मूंगफली , चिवड़े , गजक भुग्गा , तिलचौली , मक्की के भुने दाने , गुङ , फल आदि खाने के लिए देते हैं ।

घरों में हर्षोल्लास के साथ गीत गाते है। देर रात तक ढोलक के फड़कते ताल, गिद्दों – भगड़ों की धमक तथा गीतों की आवाज गूंजती रहती है । पंजाब की कई जगहों परंपरागत वेशभूषा पहनकर महिलाएं व पुरुष नृत्य करते हैं ।

पर्व की महिमा , महत्व और मान्यताएं : Lohdi in Hindi

किसानों की खुशहाली से जुड़े लोहड़ी पर्व की जुड़ी है । लोकोक्ति के अनुसार , ‘ लोही ‘ से बना लोहड़ी पर्व , जिसका अर्थ है ‘ वर्षा होना , फसलों का फूटना ‘ ।

ठंड के मौसम में किसान अपने खेत फसलों के बढ़ने और उनके पकने का इंतजार पर्व की महिमा , महत्व और मान्यताएं- बुनियाद मौसम बदलाव तथा फसलों के बढ़ने से की जुताई – बुवाई जैसे सारे फसली काम करके करते हैं ।

इसी समय से सर्दी भी घटने लगती है , इसलिए किसान लोहड़ी पर्व के माध्यम से इस सुखद , आशाओं से भरी परिस्थितियों को सैलिब्रेट करते हैं । पंजाब की लोक – कथाओं में मुगल शासनकाल के दौरान एक मुसलमान डाकू था , दुल्ला भट्टी ।

उसका काम था राहगीरों को लूटना , और गरीबों की मदद करना । उसने एक निर्धन ब्राह्मण की दो बेटियों सुंदरी और मुंदरी को जालिमों से छुड़ाकर उनकी शादी की तथा उनकी झोली में शक्कर डाली ।

एक डाकू होकर भी निर्धन लड़कियों के लिए पिता का फर्ज निभाकर वह सभ्यता की एक किवदंती बन गया और आज भी लोहड़ी के मौके पर उसको याद करते हैं ।

पोंगल

पोंगल भारत के दक्षिणी क्षेत्र तमिलनाडु , आंधप्रदेश और कर्नाटक में मकर संक्रांति पोंगल ‘ के रूप में मनायी जाती है ।

इन प्रदेशों की स्थानीय भाषा में पोंगल शब्द का अर्थ है चावल से बनाया गया मीठा और स्वादिष्ट व्यंजन । नई फसल का स्वागत करने के लिए एक मिट्टी के बर्तन में दूध उबाला जाता है और फिर उसमें नए चावल , दाल व घी डालकर खिचड़ी बनायी जाती है ।

इसे पूरे परिवार के लोग खाते हैं । पोंगल का दूसरा दिन ‘ मटू पोंगल ‘ के रूप में मनाया जाता है । इस दिन किसान अपने पशुधन को स्वच्छ कर फूलों व घंटियों से सजाता है , उनके अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता है ? और अच्छी फसल प्राप्त होने का धन्यवाद देता है ।

तमिल पंचांग का नववर्ष पोंगल के पर्व से प्रारंभ होता है । समय के बदलते रंग के साथ कई पुरानी रस्में और त्यौहारों का आधुनिकीकरण हो गया है । लोहड़ी पर भी इसका प्रभाव पड़ा है ।

शायद कुछ लोगों को तो लोहड़ी के इन पुराने गीतों और लोहड़ी के इतिहास के बारे में पता भी नहीं होगा । आजकल लोहड़ी (Lohdi) के इन गीतों का स्थान ‘ डीजे ‘ ने ले लिया है । भले कुछ भी हो , लेकिन लोहड़ी रिश्तों की मधुरता , सुकून , प्रेम और भाईचारिकता का प्रतीक है ।

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