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Saturday, October 1, 2022

योगासन से बढ़ाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता | Yogasan ke Fayde

Yogasan ke Fayde: आधुनिक जीवनशैली ने हमारे आहार, विहार , आचरण को जिस तरह प्रभावित किया है , उसका असर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी पड़ा है । इस कारण लोग सर्दी , जुकाम , खांसी , बुखार , सिरदर्द आदि समस्याओं से अकसर परेशान दिखते हैं ।

ऐसे में सेहत को बेहतर बनाने के लिए पोषक आहार लेने के साथ – साथ योगासन करना भी जरूरी होता है । किन – किन यौगिक क्रियाओं का अभ्यास कर आप अपनी प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर कर सकते है।

कुछ ऐसे योगासन जिससे आप अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते है | Yogasan ke Fayde

धनुरासन

Yogasan ke Fayde

धनुरासन पेट के बल लेटकर पीछे से से दाएं पैर के टखने को दाएं हाथ से तथा बाएं पैर के टखने को बाएं हाथ से पकड़ें ।

गहरा श्वास भरते हुए आगे से फिर छाती और कंधों को तथा पीछे से दोनों पैरों और जांघों को ऊपर उठाएं । पैरों को आकाश की दिशा में ले जाएं और सांस को सामान्य छोड़ दें ।

एक मिनट से शुरू करते हुए 3 से 5 मिनट तक इस आसन को करने का अभ्यास करें । आसन में ध्यान नाभि केंद्र पर रखते हैं ।

पश्चिमोत्तानासन

Yogasan ke Fayde

पश्चिमोत्तानासन समतल जमीन पर बैठे । दोनों पैर सीधे रखते हुए कमर सीधी रखें । गहरी सांस भरते हुए दोनों हाथों को एक साथ ऊपर उठाते जाएं ।

श्वास भरते हुए आगे की ओर झुकते हुए पंजों को हाथों से पकड़ लें । जितनी सरलता से आगे की और झुक सके , झुकें और माथे को घुटनों से छूने का प्रयास करें ।

इस स्थिति में दो – तीन मिनट तक रुकें । श्वास सामान्य रखें तथा ध्यान शरीर के खिचाव तथा दबाव पर रखें । जिस तरह आसन आरंभ किया था , उसके विपरीत क्रम से आसन को समाप्त करें ।

सर्वांगासन

Yogasan ke Fayde

सर्वांगासन पीठ के बल पर दोनों हाथों का सहारा लेते हुए अपने दोनों पैरों तथा कमर को ऊपर की ओर उठाएं ।

इस स्थिति में शरीर का सारा वजन दोनों कंधों , गर्दन तथा सिर पर आ जाएगा और ऊर्जा का प्रवाह सिर की ओर हो जाएगा । इस स्थिति में सिर व गर्दन को सीधा रखें ।

उसे दाएं या बाएं मोड़ने का प्रयास बिल्कुल न करें । 1 मिनट रुकते हुए 3 से 5 मिनट तक इस आसन का अभ्यास करें ।

हलासन

Yogasan ke Fayde

हलासन । सर्वांगासन की स्थिति में रहते हुए दोनों पैरों को सिर के पीछे जमीन पर सटाने का प्रयास करें ।

शरीर में सबसे अधिक दबाव गर्दन तथा कंधों पर पड़ेगा और खिचाव रीढ़ की हड्डी में अनुभव होगा । थोड़ा – सा दबाव थाइरायड ग्रंथि पर पड़ेगा ।

श्वास की गति सामान्य रखें । इस अवस्था में 3 से 5 मिनट तक रुकने का प्रयास करें । वापस आने के लिए दोनों हाथों को जमीन पर रखते हुए धीरे – धीरे कमर , नितंब तथा दोनों पैरों को सहज भाव से जमीन पर ले आएं ।

5 से 10 बार गर्दन को दाएं से बाएं मोड़ें , ताकि गर्दन में कोई खिंचाव या दबाव न रह जाए ।

प्राणायाम योगासन

कपालभाति

Yogasan ke Fayde

कपालभाति कमर को सीधा रखते हुए दोनों हाथों को घुटनों पर ज्ञान मुद्रा या चिंतन मुद्रा में रखें । धीरे – धीरे श्वास को नाक से बाहर छोड़ने की कोशिश करें

श्वास लेने की आवाज न आए , लेकिन श्वास छोड़ने की आवाज तीव्र गति से आए । जैसे छींकते , ऐसी ही आवाज कपालभाति प्राणायाम करते समय आती है ।

Yogasan ke Fayde

उज्जाई प्राणायाम

योगासन से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता

इस प्राणायाम को ध्यान की ओर ले जाने वाला मुख्य द्वार भी कहा जा सकता है । इसमें कंठ की सहायता से नाक से गहरा – लंबा श्वास भीतर लेना है ।

श्वास लेते समय आप कंपन महसूस करेंगे । श्वास को फिर धीरे धीरे नाक से ही छोड़ दें । नए लोगों को इसके अभ्यास में दिक्कत हो सकती है ।

ऐसे लोग प्रारम्भ में विशेषज्ञ की सहायता लें इसके अभ्यास से प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होगी ।

भस्त्रिका प्राणायाम

Image By Pixabay

इसमें तीव्र गति से श्वास अंदर – बाहर करना है । श्वास अंदर लेते हुए पेट बाहर तथा श्वास छोड़ते समय पेट अंदर रखें । इस प्राणायाम से फेफड़ों की शुद्धि होती है तथा अत्यधिक शक्ति मिलती है और योगासन के फायदे (Yogasan ke Fayde) भी बहुत हैं ।

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